No ola,uber,rapido in Delhi?

The Delhi Transport Department issued a public notice to Ola, Uber and Rapido to stop their bike taxi services in the capital effective immediately, mention the breaking of the Motor Vehicles Act, 1988

Delhi is not only the capital of India. delhi is also a dream city for millions of people many of them come to complete their with big dreams,better employment opportunity,study and better life. Barely a few formulate what they coveted . In delhi most of people hardly arrange their two time meals,education for kids this basic need provide to family a normal uber driver work more than 12 hour in a day.

There are over 120,000 drivers in the capital who provide the service and undertake as many as 3 million to 4 million rides a week, making it the largest market in the country for the service.

After, the delhi government has announced a ban on bike the decision will affect many cab aggregators such as ola,uber. delhi transport department says that two wheelers having private registration number are being use to carry passengers . the move will also affect many customers that rely on two-wheeler via ola,uber,rapido.many of citizens also prefer affordable mode of transport.

Delhi transport department also mentioned that if service providers like Ola, Uber, and Rapido riders continue to provide bike taxi service in Delhi, then a fine of Rs 5,000 will be charged. If the offence is committed the second time or subsequently, then a fine of Rs 10,000 will be charged as well as imprisonment.the offence is repeated, the driving license of the driver will also get suspended for a minimum period of three years.

जनता की परेशानियों का आखिर कौन हैं जिम्मेवार?



2022 की शुरुआत से ही भारत सरकार की कोशिश रही है जनता की परेशानियों को कम करना , लेकिन हर प्रयास नाक़ाम रहा है। Covid से मारी जनता आंदोलन करने का रास्ता अख्तियार कर चुकी हूं, क्योंकि 2 साल के lockdown, भुखमरी और बेरोजगारी से जनता एकदम त्रस्त आ चुकी है। जनता भारी उम्मीदों से एक सरकार चुनती है, सोचती है सरकार उनकी दिक्कतों का ख़्याल रखेगी, लेकिन सरकारें उनकी आकांक्षाओं पर पूरी तरह से नाक़ाम रही है।

साल के शुरुआत मे ही 28 जनवरी को RRB NTPC रेलवे परीछाओ मे देरी के कारण बिहार के छात्रों ने प्रदर्शन करना शुरू किया और धीरे धीरे ये प्रदर्शन बिहार से उत्तर प्रदेश तक पहुँच गया | ये पूरा मामला उत्तर प्रदेश के चुनाव से पहले का मामला था जिसके कारण कई चुनावी दलों ने इसका फायदा बखूबी उठाया और सियासी दल छात्रों के इस प्रदर्शन मे शामिल हुए | बेरोजगारी के खिलाफ बिहार के छात्रों का ये आंदोलन समाप्त हुआ भी नहीं था की उतने मे ही february में कर्नाटक के उडुपी जिले से छात्रों ने हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन की शुरुआत कर दि | उडुपी से शुरू हुआ ये आंदोलन भी धीरे धीरे पुरे दक्षिण भारत मे फ़ैल गया जिसके कारण हिन्दू मुस्लिम के बीच काफी अन बन देखने को मिला | हिजाब आंदोलन के कारण छत्रओ का कॉलेज में हिजाब पहनने पर कॉलेज प्रशासन द्वारा रोक लगाने पर किया गया था | मुस्लिम छात्राओं के कॉलेज में हिजाब पहनने पर हिन्दू छात्र भी कॉलेज में भगवा साफा / शौल पहनने की माँग पे उतर आये मामला इतना ज्यादा बढ़ गया की सरकार को धारा 144 लागु करते हुए सभी स्कूल कॉलेज बंद करना पड़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया | इस वक़्त भी चुनावी माहौल था जिसका फायदा सियासी दलों द्वारा बखूबी उठाया गया |

आंदोलन का ये कार्यक्रम मार्च के महीने मे जरा शांत देखने को मिला जिसका मुखये कारण चुनावी नतीजे की घोसना हो सकती हैं | चुनाव मे फिरसे भारतीय जनता पार्टी के जितने के बाद मार्च का महीना पिछले दो महीनों के मुकाबले काफी शांति पूर्वक गुजरा लेकिन अगले ही महीने अप्रैल मे अचानक से डीज़ल पेट्रोल के बढ़ते दामों ने जनता को झकझोर कर रख दिया जिसके कारण जनता काफी निरास दिखी | 6 माहीने के बाद अचानक से डिसल पेट्रोल और cng के दिन पर दिन बढ़ते दाम ने जनता को परेशानियों मे डाल दिया |

कुछ समये बाद bjp पार्टी के सके्य नूपुर शर्मा का एक बयान लोगो के लिये इतना ज्यादा भरकओ हो जाता हैं की नूपुर शर्मा के खिलाफ पुरे देश में नरेवाजी होने लगती हैं और उन्हें जेल मे डालने, फांसी पर लटकाने तक की माँग होने लगती हैं यहां तक की पार्टी से भी हटा दिया जाता हैं क्युकी नूपुर शर्मा के खिलाफ केबल भारत मे ही नहीं बल्की भारत के बाहर भी कई कलाकार और सरकार आंदोलन करने लगते हैं | नूपुर शर्मा ने टीवी पर prophet मोहमद के ऊपर एक बयान दिया जिससे सारे मुस्लिम गुट भरक उठे और ये रास्ट्रीय मुद्दा बन गया |

नूपुर शर्मा का ये मुद्दा चल ही रहा था तभी मांगलवार 14 जून को सरकार ने अग्निपथ योजना का ऐलान किया जिससे युवक जनता काफी आक्रोश मे आ गये जिसका प्रदर्सन कई राज्यों मे जम कर किया गया खास तौर पे यूपी,बिहार,राजस्थान जैसे राज्य में जिसे देखते हुए हम अंदाजा लगा सकते हैं की युवक इस योजना से काफी असंतुस्ट हैं | यह आंदोलन यही नहीं रुका कई युवको ने अपने जान तक गवा दिए मामला इतना ज्यादा बढ़ गया की बिहार के कई जिलों मे इंटरनेट सेवा बंद कर दि गयी | सरकार अग्निपथ योजना को समझाने मे काफी बुरी तरीके से असफल रही जिसके कारण आज जान – माल का नुकसान पूरी तरीके से देखने को मिल रहा हैं | जिसके जिम्मेवार केबल सरकार होंगे |

6 महीने के अंदर ये जनता द्वारा चौथा आंदोलन किया गया हैं जिससे हम ये साफ तौर पे अंदाजा लगा सकते हैं की सरकार जनता के उम्मीदों पे खरे उतरने में असफल साबित हो रही हैं |

हिजाब पर बवाल…क्या यही है नये भारत का हाल

कर्नाटक के उडूपी के कॉलेजो में हिजाब पहनकर आने पर अचानक से रोक लगा दिया गया जिससे लोगो के बीच अन – बन होनी शुरू हो गयी | यह बात शुरुआत में काफी छोटी और मामूली लग रही थी पर धीरे – धीरे यह मुद्दा बढ़ते गया और रष्ट्रीय मुद्दों में से एक बन गया | एक तरफ मुस्लिम संगठन तो दूसरी तरफ हिन्दू संगठन अपने बातो पे अड़े रहे जिससे ये मामला धीरे – धीरे कोर्ट तक पहुँच गया |

इस वाक्या की शुरुआत कहाँ और कब से हुई?

इस पुरे वाक्या की शुरुआत होती है दिसंबर के आख़री हफ्ते में कर्नाटक के उडुपी जिले से वहाँ के स्थानीय कॉलेज गवेरमेंट प्री यूनिवर्सिटी फॉर गर्ल्स उडुपी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्रों ने आरोप लगाया की 27 दिसंबर 2021 को कॉलेज में हिजाब पहन कर बैठने पर कॉलेज प्रशासन ने उनपर रोक लगाया है |कॉलेज प्रशासन के अनुसार छात्राएँ केबल कैंपस में हिजाब पहनकर आ सकती लेकिन कॉलेज के क्लास में नहीं जा सकती है | कुछ समय बाद 15 जनवरी को कुछ छात्राओं की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई जिसमे वो कॉपी पेन के साथ हिजाब पहने कॉलेज के सीढ़ियों पे बैठी दिखाई दि जिसके बाद ये मामला पुरे देश मे फैल गया |

क्या इससे पहले कॉलेज मे हिजाब पहनकर आने की अनुमति थी?

इस मामले को पुरे गहराई से जानने के लिये जब छात्राओं के तरफ से उनकी बात जानने की कोशिश की तो उनका कहना था की कॉलेज मे पहले से हिजाब पहनकर आने की अनुमति थी लेकिन क्लास के अंदर हिजाब पहनना मना था | कॉलेज एडमिसन फॉर्म के क्लाउस मे इस बात को पहले से ही लिखा गया हैं और बकायेदा छात्राओं ने इसपे अपनी मंजूरी के साथ सिग्नेचर भी किये हैं | इन सब चीज़ो के बाबजूद अचानक से 2021 के दिसंबर महीने मे छात्राएँ कॉलेज के अंदर हिजाब पहनने की माँग करने लगती हैं | उनके अनुसार उनहोने अपने सीनियर को क्लास के अंदर हिजाब पहने बैठे देखा हैं जिसके बाद अब वो भी चाहती हैं की उन्हें भी कॉलेज के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति दि जाये | कॉलेज प्रशासन के अनुसार ऐसा कोई वाक्या इतने सालो मे देखने को नहीं मिला हैं जिसमे छात्राये हिजाब पहनने की माँग कर रही हो | पुरे कॉलेज मे लगभग 150 से ज्यादा मुस्लिम छात्राएँ हैं लेकिन पहले कभी किसी ने ऐसी माँग नहीं की हैं | सूत्रों के अनुसार कॉलेज प्रशासन का कहना हैं की ये छात्राएँ campus front of India से जूरी हैं जिसके कारण ये सभी को अपनी बातो मे ला कर मामले को भरकओ बना रही हैं |

Campus front of इंडिया क्या हैं?

Campus front of India एक संगठन हैं जो Popular front of India से जुड़ा हुआ हैं | Popular front of India संगठन की शुरुआत 2006 से हुई थी | ये एक मुस्लिम संगठन हैं दझीन भारत केरल,तमिलनाडु,कर्नाटक जैसे राज्यों मे इसकी नीव हैं | भारत सरकार इस संगठन को बैन करने की प्रक्रिया मे लगी हुई हैं क्युकी किसी राज्यों से इस संगठन के बारे मे कोई अच्छे नतीजे देखने को नहीं मिले हैं |

गुजरते दिनों के साथ साथ मामला बढ़ता गया और सरकार तक पहुँच गया जिसके बाद सरकार ने एक कमिटी बनाई और आदेश दिया की जब तक सरकार किसी नतीजे तक नहीं पहुँचती हैं तब तक कॉलेज मे यूनिफार्म पहनकर आना हैं जिसमे की हिजाब शामिल नहीं हैं | इस फैसले से मुस्लिम छात्राये असंतुष्ट रही जिसके बाद वो हिजाब या किताब दोनों मे से किसी एक को चुनने पर आ गयी | छात्राओं के रबाइये को देखते हुए कर्नाटक के MLA ने कहाँ की जब तक सरकार द्वारा कोई फैसला सामने नहीं आता तब तक जिन्हे हिजाब पहनकर आना हैं उनके लिये ऑनलाइन क्लास लिये जायेंगे और बाकि जो बिना हिजाब के आना चाहे वो कॉलेज आ सकते हैं | ये सब यही नहीं रुका ये मामला पूरी तरफ फैल गया कई स्कूल कॉलेज मे और भी छात्राये हिजाब पहनकर कॉलेज मे जाने की माँग करने लगी जिसके साथ कुछ हिन्दू छात्र भी कॉलेज मे भगवा साफा,दुप्पटा पहन कर आने की माँग करने लगे | इन सब चीजों के कारण मुस्लिम और हिन्दू गुटों के बीच काफी अन – बन होने लगी कई बाहरी लोगो ने भी आकर सभी छात्रों को अपने बारकओ बयान से आक्रोषित किया और मामले को बढ़ाया | हालातो को देखते हुए कर्नाटक सरकार को सभी स्कूल कॉलेज बंद करने के साथ साथ धारा 144 भी लागु करनी परी |

सरकार का फैसला क्या आया

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 15 मार्च को हिजाब मामले से जुड़े सारे याचिका को ख़ारिज करते हुए फैसला किया की हिजाब पहनना इस्लाम मे जरुरी नहीं हैं जिसके अनुसार कॉलेज मे हिजाब पहन कर आने की आनुमति नहीं दि जाएगी सभी को कॉलेज के अनुसार रखा गया यूनिफार्म पहनकर ही आना होगा नाही कोई साफा और नाही कोई हिजाब |

भोपाल गैस तबाही

आखिर कौन है इस घटना का जिम्मेवार?

3 दिसंबर 1984 रात के समय मे वहाँ मौजूद मजदूरों को सास लेने मे तकलीफ होने लगती है| यूनियन कार्बइड नाम की कारखाने (factory) मे सेवीन नाम का कीटनाशक बनाया जा रहा था| सेवीन का इस्तेमाल खेतो मे किट-पतंगो को मारने के लिये किया जाता था लेकिन इस मे एक बहुत ख़तरनाक द्रब्य (liquid) का इस्तेमाल किया जा रहा था| 3 दिसंबर की रात मे जानलेबा द्रब्य MIC (methyl isocyanide) गैस पानी के साथ रिएक्शन कर जाती है जिसके कारण बहुत बड़ा धमाका होता है|भोपाल मे हजारों के तादाद मे लोग मारे जाते है|इस घटना को दुनिया का सबसे बड़ा औद्योगिक घटना माना जाता है | क्युकी आज भी भोपाल की जनता इस ख़तनाक घटना के कारण जूझ रही है|

यूनियन कार्बइड कंपनी करीब 100 साल से भी जादा पुरानी है|इस कंपनी के कई जाने-माने चीजे काफी मशहूर है जैसे एवेरेडी बैटरी साथ ही ये रॉकेट ईंधन भी बनाती है|दुनिया भर मे यूनियन कार्बइड के कई कारखाने फैले हुए है| 1994 मे इस कंपनी का नाम यूनियन सेरोइड से बदल कर एवेरेडी इंडस्ट्री कर दिया गया था| 1969 में एवेरेडी इंडस्ट्री ने भोपाल में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खोला खास इनसेड़ीसाइड सेवीन को बनाने के लिये|इस इनसेडिसाइड को बनाने के लिये जनलेवा केमिकल MIC का इस्तेमाल किया जाता था जो की बाहरी देशो से लाया जाता था | 1980 के दौरान UCIL को काफी बड़ा नुक्सान का सामना करना पड़ा जिसके कारण कंपनी MIC को भोपाल के कारखाने में बनाना शुरू कर देती है | MIC को बनाने के लिये सरकार भी कंपनी को इज़ाजत दे देती है साथ ही कंपनी को एवोकेशन प्लान बनाने के लिये भी कहा जाता है जिससे भोपाल में रहने वाले लोगो को जानकारी हो की यदि कभी किसी कारणबस गैस लीक कर जाये तो उसका सामना कैसे किया जायेगा | कंपनी ने कभी भी जनता के सामने एवोकेशन प्लान को प्रस्तुत नहीं किया नाही सरकार ने दुबारा इसपे ध्यान दिया |

1981 के दौरान ही जब कंपनी नुकसान से जूझ रही थी तभी MIC के कारण एक मजदूर की जान चली जाती है लेकिन इसपे भी कोई करवाई नहीं की जाती है | नुकसान के कारण कंपनी जरुरी चीज़ो से ध्यान हटा कर कटौती करने लगती है | ये आने वाले खतरे का पहला और काफी बड़ा संकेत था |

इन सभी घटनाओ के बीच बदलते परिस्थिति को देखते हुए राजकुमार केशवाणी नाम के पत्रकार ने इसके पीछे पूरी जांच पड़ताल की जिसने उन्हें ये पता चलता है की UCIL में फोसजन नाम के गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है | ये वही गैस है जिसका इस्तेमाल जर्मनी में वर्ल्ड वॉर 2 के दौरान किया जा रहा था | इसके बाद राजकुमार केशवानी ने कई रिपोर्ट तैयार किया जैसे “नाम समझो गे तो आखिर मिट ही जाओगे ” और “बचाइये हुजूर इस शहर को बचाइये ” साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से लेकर उच्च न्यायालय तक को अर्जी लिखी जिसपे की कोई ध्यान नहीं दिया गया | जिसे खतरे का दूसरा संकेत भी कहा जा सकता है |

घटना के बाद कोर्ट में पेसी

1985 में सांसद अर्जी दी गयी जिसके कारण भारत की सरकार को अधिकार मिलता है की कोर्ट में भोपाल के लोगो पेश कर सकते है |इसके बाद कानूनी तौर पर करवाई शुरू की जाती है जो की आज भी चल रही है |आखिर कौन है इस हादसे के पीछे का जिम्मेदार? जांच पड़ताल के लिये भारत की सरकार और UCIL अपनी-अपनी जांच शुरू करते है जिसमे दोनों पकछ एक दूसरे को दोषी ठहराते है | 1984 में कारवाई ख़तम हो जाती है जब UCIL कंपनी 800 करोड़ रूपये जुर्माना के तौर पे देने के लिये तैयार हो जाती है | माध्य प्रदेश की जनता इस फैसले से संतुष्ट नहीं रहती है |1989 me इसरो के चेयरमैन सतीश धवन प्रोटेस्ट करने के लिये पिटीशन फ़ाइल करते है जिसके बाद ये केस फिर से खुल जाता है |जिसके कारण यूनियन कार्बइड कंपनी और वारेन अंद्रेन को दोषी करार किया जाता है | केस के दौरान ही 2014 में वारेन की मृत्यु हो जाती है | यूनियन कार्बइड के खिलाफ आज भी क्रिमिनल केस चल रहा है | हादसे के शिकार हुए लोग आज भी जूझ रहे है |

नये कानूनी औद्योगिक नियम

इस हादसे को देखते हुए सरकार ने कई नये नियम लागू किये जैसे पर्यावरण संरछन नियम ( enviroment protection act ) इस क़ानून के अनुसार कंपनी वातावरण को सुरछित रखने के लिये खुद से कदम उठा सकती है | कारखाना नियम (factory act ) जिसके अनुसार कंपनी को चलाने के लिए किसी जिम्मेवार व्यक्ति को जिम्मेदारी दी जाये |