2022 के पांच मुख्य राज्यों के चुनाव मे चार जगह पर बीजेपी सरकार का ही प्रचंड झंडा लहराता हुआ दिखा|बीजेपी सरकार का मुख्य उदेश्य बाते या धार्मिक स्थलों को बढ़ावा देना होता है | उसमे से एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा राम मंदिर भी है जिसका इतिहास काफी पुराना और बिबादो से भरा रहा है

करीब 500 साल पहले 1528 मे बाबरी मस्जिद बनाई गयी थी|यह मस्जिद बाबर के सिपाही मिर्जाहा के द्वारा बनबाया गया था|लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है की यह मस्जिद मंदिर को तोर कर बनाया गया था|मंदिर और मस्जिद के कारण हिन्दू और मुस्लिम गुटों के बिच पहली बार दंगे होने शुरू हुए करीब सन 1853-1859 के दरमियान मे | दंगों को तेजी से बढ़ते देखते हुए ब्रिटिश सरकार बिच मे आती है हालातो को नियंत्रण मे लाने के लिए|ब्रिटिश सरकार ज़मीन को दो हिस्सों मे बाट देती है अंदर का हिस्सा मुस्लिम को और बाहरी हिस्सा हिन्दुओ को देदेती है| इस फैसले से दोनों गुट संतुष्ट होते है और हालत काफ़ी नियंत्रण मे आ जाते है |
कुछ समय बाद, करीब 1885 मे यह मामला पहली बार अदालत मे पंहुचा जब महंत रघुबीर दास हिन्दुओ को दिए गए बाहरी स्थान पर पूजा करवाने के लिए छत की मांग करते है | आजादी के बाद 23 दिसंबर 1949 मे मस्जिद के अहेम हिस्से मे भगवान राम की मूर्ति रख दी जाती है और हिन्दू उस हिस्से मे भी पूजा-पाठ शुरू कर देते है जिसके कारण हालत फिर से बिगड़ने लगते है| हालात बद से बतर होते हुए देख कर सरकार पुरे हिस्से को बंद कर देती है|सरकार के इस पाबन्दी को हटाने के लिए कई सिविल केस फ़ाइल किये जाते है|1950 मे महंत रामचंद्र दास हिन्दू को पूजा करने की अनुमति देने के लिए केस करते है 1959 मे निरमोही अखाड़ा केस फ़ाइल करती है पूरा हिस्सा हिन्दुओ को दे देना चाहिए और 1961 मे सुन्नी बक़ बोर्ड केस फ़ाइल करती है की सारा हिस्सा उन्हें दे देना चाहिए| काफी समय तक ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहता है|1986 मे फैज़ाबाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाती है और सारा हिस्सा हिन्दूओ को देने की अनुमति दे देती है|इस फैसले से मुस्लिम काफी असंतुष्ट होते है और अपनी कमिटी बनाते है जिसे बाबरी मस्जिद कमिटी के नाम से जाना जाता है

कुछ समय बाद फिर से हालात बिगड़ने लगते है तभी 1990 मे लाल कृष्ण आडवाणी रथ यात्रा की शुरुआत करते है गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या (उत्तर प्रदेश )तक की|इस यात्रा का परिणाम काफी गलत दिखाई देता है जनता काफ़ी आक्रोश मे आजाती है कई बेगुनाह लोग मारे जाते है जिसके कारण आडवाणी को बिहार मे गिरफ्तार कर लिया जाता है|बिगड़ते हालात को देखते हुए 1991 मे उत्तर प्रदेश के सरकार कल्याण सिंह ब्रिटिश सरकार के तरह पुरे हिस्से को अपने नियंत्रण मे लेलेती है|6 दिसंबर 1992 मे काफी बड़ा मोड़ आते जिसमे करीब 1000 की संख्या मे कर सेबक अयोध्या पहुंच कर बाबरी मस्जिद को ढाह कर उस जगह पर अस्थयी रूप से एक राम मंदिर बना देते है|इस पुरे घटना के बाद पुरे भारत मे काफी दंगे होने लगते है|इस समय काल मे नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार थी उनका कहना था इस पुरे बिबादित स्थान पर एक मंदिर, एक मस्जिद, एक पुस्तकालय, एक संग्रहालय जैसी सुबिधाओं का निर्माण किया जाये|कांग्रेस के इस फैसले पे बीजेपी सरकार बिरोध करती है और इस फैसले को ख़ारिज कर दिया जाता है|2002 मे बीजेपी की सरकार आती है जिसमे अटल बिहारी बाजपाई सत्ता मे रहते है|बाजपेई जी एक अयोध्या बिभाग शुरू करते है जिसका अहेम मुदा हिन्दू और मुस्लिम के बिच बात – चित करके एक निर्णय तक पहुंचना होता है|अप्रैल 2002 मे ये मामला अलहाबाद हाई कोर्ट मे जाता है जहाँ पे सुनबाई के लिए ASI की रिपोर्ट की माँग की जाती रिपोर्ट से यह पता चलता है की 12वी सदी मे उस स्थान पर एक राम मंदिर था और 15वी सदी मे मस्जिद बनवाया गया था|साथ-ही-साथ स्थानीय निबासियो का कहना है की इस स्थान पर मंदिर को तोर कर मस्जिद बनाया गया था |

2016 मे सुप्रीम कोर्ट मे केस फ़ाइल की जाती है और 2019 मे फाइनल मैडिटेशनल रिपोर्ट दी जाती है जिसमे लगभग 40 दिन की सुनबाई होती है यानि की 6 अगस्त से 14 अक्टूबर तक तारिक चलती गई|सुप्रीम कोर्ट संबिधान के धारा 142 का इस्तेमाल करते हुए फैसला करती है की बाबरी मस्जिद का 2.77 एकर वाला हिस्सा राम लला बिराजमान को जायेगा और केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार के द्वारा सुन्नी वक़्त बोर्ड 5 एकर जमीन दी जाएगी और साथ ही दोनों पकछो को एक ही दिन जमीन दी जाए ये पूरा मामला काफी उत्तार-चढ़ाओ से भरा रहा और ये काफी ऐतिहासिक मामलो मे से एक है इतनी लम्बी करवाई चलने वाला मामलो मे से एक रहा है |